Thursday, October 25, 2012

इश्क की संजीदगी

जब  भी  वह  माही के पास  आते  है , जज्बातों  को  थाम  लेते  है …
मगर  उनकी  निगाहे  सब  बयां  कर  जाती  है ….
यही इश्क कि ख़ूबसूरती है...उनका दिल बेक़रार  हैं  मगर  जबान पर  इन्कार  है …



वह बेवजह रूठे थे , सोचा की हम उन्हें मनाने  आयेगे...
हमारी भी जिद थी की पहले पास आओ तब मनायेगे...
और अंजाम ये हुआ कि दोनों ही भींग नहीं पाए, जबकि बारिश सारी रात होती रही ..... 
 

Wednesday, February 29, 2012

बेसर्बी

वह आये न महफ़िल में, तो बेसर्बी से इंतजार करते है.... 
और अगर आ जाये तो हम महफ़िल से रुख्सत की सोचते है....
आजकल हर नया शख्श अपना सा लगता है,
कि जो अपने थे कि  उनसे मन भर गया माही का...... 

Tuesday, December 6, 2011

वफ़ा की उम्मीद..

1.
वह तो वक़्त ही बेहरम था, किसी और को क्या कहे,
जब मेरी महबूबा के पास, किसी और के लिखे ख़त मिले.....
2.
बहुत मुद्द्त हो गयी आपका दीदार किये हुए...
कि कल शाम देखा था आपको, हमारी गली से जाते हुए....
3.
गर मिले दोबारा जिंदगी में, तो अजनबी बन के रहना,
कि माही को तुमसे फिर कहीं वफ़ा की उम्मीद न हो जाये...

दिल के जख्म

1.
सबने समझाइश दी थी कि इश्क ना करना, माही को.....
अब खुद ज़माने को समझा रहे है कि इश्क एक गफलत है......
2.
वक़्त बे-वक़्त हम उनको सताया करते थे....
अब उनकी यादें वक़्त बे-वक़्त आ कर हमको रूलाया करती है....
3.
उन्हें संग दिल सनम क्यों कहे,वह तो खता माही ही की थी....
जब तलक हौसला आता, उनके हाथों में मेहंदी किसी और के नाम की थी....
4.
खुश तो वह भी नहीं रहते माही, जिन्हें उनका महबूब मिल जाता है....
फिर तुम इतने संजीदा क्यों हो, कि तुम्हे उनका इंकार मिला ...
जिंदगी में खुश रहने के लिए एक अफसाना ही काफी है...
कि कम से कम उनके जुबां पर नाम तो आया कि "माही तुमसे प्यार नहीं" .....
5.
कल हमने इस जहाँ की बुराइयों से नाता जोड़ लिया...
कि कम से कम अब आप हमें अपने दुश्मनों में तो गिनोगे....
6.
यूँ तो माही के फ़साने हज़ार हैं,
पर ज़ेहन में ख़याल उन्ही का रहता है!
सच ही कहता हें जमाना, कि बेवफाई भुलाना मुमकिन नहीं होता!!
7.
हर वक़्त जज्बात बयां करना आसान नहीं होता,
की महबूब से दिल ए हाल बयां करना मुश्किल होता...
वह तो वक़्त की मेहरबानी हो गयी माही पर...
की किसी ने महफिल में तारीफ हमारी करी और हया से उन्होंने निगाहे झुका ली ...

Thursday, October 13, 2011

जीत-हार

1.
जिंदगी में हर मर्तबा आप जीते, ये मुमकिन नहीं,
कभी हार मिले, तो उसको भी गुनगुनाना चाहिए,
ये माना कि, जीतने पर जमाना हौसला बढाता है..
मगर हार पर अपनी हौसला अफजाई करना भी न भूलना, माही...
जिंदगी एक राह है, जिसकी मंजिले अनेक है...
अब ये तुम पर है माही, कि किसी के रहबर बनो या खुदगर्ज़....
2.
सुकून म्यस्सर नहीं हुआ माही को, उन्हें भूलने पर भी....
रह रह कर उनके झूठे वादे याद आ जाते है.....
3.
हर किसी के जिंदगानी का हिस्सा - यह हो न सका, वह मिल न सका....
4.
जब ज़माने में लगते है मेले...
हम हो जाते है और भी अकेले....
5.

Wednesday, October 12, 2011

मुमकिन नहीं..

हमने तो आपसे कुछ नहीं कहा, आप ही बहुत कुछ समझ गए...
हमने तो हुस्न की तारीफ की थी, आप उसे इकरार-ए-मोहब्बत समझ गये ...
ये कच्ची उम्र की नादानियाँ है, जरा संभल  के  चलना...
हमने तो आपसे साफगोई  की, लेकिन औरो की नीयत का क्या कहे....
वह एक पल था, जब हम डगमगा गये थे...
लेकिन माही ने अगले ही पल दूरियाँ बढ़ा ली थी......
ये मुमकिन नहीं  कि अब हमारा जहाँ एक हो ..
मिले हो ज़िन्दगी के उस मोड़ पर, जब माही का जहाँ किसी और का हो चुका हैं.....
हमने तो आपसे साफगोई  की, लेकिन औरो की नीयत का क्या कहे....

महबूब खुदा है....

                                १
हर शख्स को एक पहचान चाहिए,  नया वजूद चाहिए...
अब क्या करे, कि माही के अख्स को भी एक नया शख्स चाहिए.....
                                २
हर शख्स को तारीफ पसंद है, चाहे वह झूठी ही क्यों न हो...
हमने अपने महबूब को सेवंती का फूल कहा तो वह खफा हो गये....
                              ३
हमें खुदा की बेरुखी भी सर आँखों पर....
बशर्ते हमारे महबूब पर उसकी नज़ारे इनायत हो बनी रहे ..
                           ४
ज़माने में हर शख्स ने माही से मुस्कराने का सबब पूछा....
ये और बात हे, की जवाब न देना भी माही ने ज़माने से सीखा हैं....
                          ५
माही ने अपने महबूब को ही खुदा मान लिया....
कि ज़माने में अब तक  किसी को  क्या उसका खुदा मिला हे....
                        ६
ये कोई बात नहीं कि माही को जीतना नहीं आता है...
मगर उसे दूसरो की जीत पर खुश होने का हुनर भी आता है.....
                            ७
भला हो उन दोस्तों का, जो माही को जीना सीखा रहे है....
अब उन्हें कौन समझाए कि जीना सिर्फ अपने लिए नहीं होता.........