Thursday, February 20, 2014

समझाइश

हो सके तो खुश रहो अनवरत,
कि
दुखों से क्यों नाता जोड़ते हो!

जहाँ तक हो सके, सबसे मिलते रहो,
कि
अंजानो को भी अपना बनाते रहो अनवरत!

कारवॉ का इंतजार करना मंजिलो की राह में,
कि
लोग खुद तुम्हारे साथ हो लेगे अनवरत !

हो सके तो खुश रहो अनवरत।।।

कभी किसी को समझाइश मत देना अनवरत,
खुद
को समझा सको तो समझा लेना!
कभी
किसी पर इल्जाम मत लगाना इस जहाँ में,
कि
गुनहगार बनाना दुनिया का काम है अनवरत!

हो सके तो खुश रहो अनवरत।।।

चाँद को जमीं पर मत लाना अनवरत,
जमीं
को चाँद बना सको तो बना लेना!

कभी वफ़ा करके जिक्र मत करना अनवरत,
जो
जिक्र करते हैं, वह अक्सर बेवफा होते है!
कभी
किसी एक के हो जाना अनवरत,
कि
मुश्किल है किसी एक को अपना बनाना !

हो सके तो खुश रहो अनवरत।।।

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