Thursday, February 20, 2014

समझाइश

हो सके तो खुश रहो अनवरत,
कि
दुखों से क्यों नाता जोड़ते हो!

जहाँ तक हो सके, सबसे मिलते रहो,
कि
अंजानो को भी अपना बनाते रहो अनवरत!

कारवॉ का इंतजार करना मंजिलो की राह में,
कि
लोग खुद तुम्हारे साथ हो लेगे अनवरत !

हो सके तो खुश रहो अनवरत।।।

कभी किसी को समझाइश मत देना अनवरत,
खुद
को समझा सको तो समझा लेना!
कभी
किसी पर इल्जाम मत लगाना इस जहाँ में,
कि
गुनहगार बनाना दुनिया का काम है अनवरत!

हो सके तो खुश रहो अनवरत।।।

चाँद को जमीं पर मत लाना अनवरत,
जमीं
को चाँद बना सको तो बना लेना!

कभी वफ़ा करके जिक्र मत करना अनवरत,
जो
जिक्र करते हैं, वह अक्सर बेवफा होते है!
कभी
किसी एक के हो जाना अनवरत,
कि
मुश्किल है किसी एक को अपना बनाना !

हो सके तो खुश रहो अनवरत।।।

Sunday, January 19, 2014

Teri yaad...

तेरी याद दिल ओ दिमाग से जाती नहीं,
क्या करे तेरे बिना ये दुनिया जाँचती नहीं,
रह रह कर वह लम्हे याद आते है माही को,
जब तुम मेरे पास आ कर मुस्कराती थी....

Wednesday, November 7, 2012

तेरा जिक्र....

मीलो दूर चले आये है, लेकिन तुम अब भी कुछ दूरी पर ही दिखती हो...
सच ही कहते हे माही, कि दूरिया दिलो से होती है फासलों से नहीं...


ज़माने से तेरा जिक्र भी नहीं किया जाता और तेरी पहचान भी छुपा पाना नामुकिन..
खुदा
कुछ ऐसा करे कि तेरा राज भी बयाँ हो जाये और माही तुम्हारा गुनाहगार भी ना बने..

कोई उनसे  न पूछे, कि उन्होंने माही से बेवफाई क्यों की...
सही वजह वह जाहिर न कर पायेगे  और माही  को बेवफा साबित करना भी मुश्किल..

Friday, November 2, 2012

सनम

तेरी  बेरुखी  भी सनम, एक प्यारी सी अदा लगती है...
तू  बताये  न  बताये,  माही को तेरे  हर  हाल  की  खबर  रहती है …..
तूने जो झूठे वादे किये थे सनम साथ निभाने के, उनको पूरा न करना....
वरना माही को  जीने के लिए कोई और बहाना ढूँढना पड़ेगा ..

Thursday, October 25, 2012

इश्क की संजीदगी

जब  भी  वह  माही के पास  आते  है , जज्बातों  को  थाम  लेते  है …
मगर  उनकी  निगाहे  सब  बयां  कर  जाती  है ….
यही इश्क कि ख़ूबसूरती है...उनका दिल बेक़रार  हैं  मगर  जबान पर  इन्कार  है …



वह बेवजह रूठे थे , सोचा की हम उन्हें मनाने  आयेगे...
हमारी भी जिद थी की पहले पास आओ तब मनायेगे...
और अंजाम ये हुआ कि दोनों ही भींग नहीं पाए, जबकि बारिश सारी रात होती रही ..... 
 

Wednesday, February 29, 2012

बेसर्बी

वह आये न महफ़िल में, तो बेसर्बी से इंतजार करते है.... 
और अगर आ जाये तो हम महफ़िल से रुख्सत की सोचते है....
आजकल हर नया शख्श अपना सा लगता है,
कि जो अपने थे कि  उनसे मन भर गया माही का...... 

Tuesday, December 6, 2011

वफ़ा की उम्मीद..

1.
वह तो वक़्त ही बेहरम था, किसी और को क्या कहे,
जब मेरी महबूबा के पास, किसी और के लिखे ख़त मिले.....
2.
बहुत मुद्द्त हो गयी आपका दीदार किये हुए...
कि कल शाम देखा था आपको, हमारी गली से जाते हुए....
3.
गर मिले दोबारा जिंदगी में, तो अजनबी बन के रहना,
कि माही को तुमसे फिर कहीं वफ़ा की उम्मीद न हो जाये...