सच ही कहते हे माही, कि दूरिया दिलो से होती है फासलों से नहीं...
ज़माने से तेरा जिक्र भी नहीं किया जाता और तेरी पहचान भी छुपा पाना नामुकिन..
खुदा कुछ ऐसा करे कि तेरा राज भी बयाँ हो जाये और माही तुम्हारा गुनाहगार भी ना बने..
कोई उनसे न पूछे, कि उन्होंने माही से बेवफाई क्यों की...
सही वजह वह जाहिर न कर पायेगे और माही को बेवफा साबित करना भी मुश्किल..