१
हर शख्स को एक पहचान चाहिए, नया वजूद चाहिए...
अब क्या करे, कि माही के अख्स को भी एक नया शख्स चाहिए.....
२
हर शख्स को तारीफ पसंद है, चाहे वह झूठी ही क्यों न हो...
हमने अपने महबूब को सेवंती का फूल कहा तो वह खफा हो गये....
३
हमें खुदा की बेरुखी भी सर आँखों पर....
बशर्ते हमारे महबूब पर उसकी नज़ारे इनायत हो बनी रहे ..
४
ज़माने में हर शख्स ने माही से मुस्कराने का सबब पूछा....
ये और बात हे, की जवाब न देना भी माही ने ज़माने से सीखा हैं....
५
माही ने अपने महबूब को ही खुदा मान लिया....
कि ज़माने में अब तक किसी को क्या उसका खुदा मिला हे....
६
ये कोई बात नहीं कि माही को जीतना नहीं आता है...
मगर उसे दूसरो की जीत पर खुश होने का हुनर भी आता है.....
७
भला हो उन दोस्तों का, जो माही को जीना सीखा रहे है....
अब उन्हें कौन समझाए कि जीना सिर्फ अपने लिए नहीं होता.........
हर शख्स को एक पहचान चाहिए, नया वजूद चाहिए...
अब क्या करे, कि माही के अख्स को भी एक नया शख्स चाहिए.....
२
हर शख्स को तारीफ पसंद है, चाहे वह झूठी ही क्यों न हो...
हमने अपने महबूब को सेवंती का फूल कहा तो वह खफा हो गये....
३
हमें खुदा की बेरुखी भी सर आँखों पर....
बशर्ते हमारे महबूब पर उसकी नज़ारे इनायत हो बनी रहे ..
४
ज़माने में हर शख्स ने माही से मुस्कराने का सबब पूछा....
ये और बात हे, की जवाब न देना भी माही ने ज़माने से सीखा हैं....
५
माही ने अपने महबूब को ही खुदा मान लिया....
कि ज़माने में अब तक किसी को क्या उसका खुदा मिला हे....
६
ये कोई बात नहीं कि माही को जीतना नहीं आता है...
मगर उसे दूसरो की जीत पर खुश होने का हुनर भी आता है.....
७
भला हो उन दोस्तों का, जो माही को जीना सीखा रहे है....
अब उन्हें कौन समझाए कि जीना सिर्फ अपने लिए नहीं होता.........
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